सोमवार, 31 दिसंबर 2012


((सद गुरु श्री    "अनंत श्री "  के जन्म दिवस  पर चरणों में एक पुष्पांजलि ))

मेरे अन्दर जब था तू
मधुबन के बसंत सा था तू
मन मंदिर में ध्यान लगाकर
देखा तो अनंत सा तू  !!

ह्रदय की गहराई में उतरा
पूनम के चन्द सा तू
साधक की आँखों से देखा
सद् गुरु , गुरु गोविंदा था तू  !!

अनहद नाद को सुना तो पाया
सुरों की सप्त लहरियों सा तू
उषा काल की ओस में झांका
निर्दोष चमकती लड़ियों सा तू  !!

पूर्व काल इतिहास को बांचा
महावीर बुद्धा सा तू
गिरि  कन्दरा गुफा में पाया
पूर्ण पुरुष सिद्धा सा था तू  !!

मन मस्तिष्क में घुस कर देखा
प्रखर पुंज प्रज्ञा सा तू
राज ऋषि  के अनुशासन का
ऐतिहासिक राजाज्ञा  था तू !!

यह  सब क्यों था
यह सब क्या था
तू जाने या खुदा जाने
 मै  तो बस इतना जानूं  कि ,
गूँगे के गुड़  जैसा था  तू  !!
मेरे अन्दर  जब जब था तू .......

---अनंत चैतन्य - लखनऊ ----

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012


----कभी उड़ लो ख्वाब के पंखो के साथ -----

मत कहो , हम थक गए है !
अभी तो कुछ पग चले है !!
थको , उठो , फिर चलो चलते रहो !
जल की धारा की तरह बहते रहो !!
पक्षियों को देखो , कैसे उड़ रहे !
फूल भी हसकर तुम्हे कुछ कह रहे !!
ऊबड़ खाबड़ रेत के है रास्ते !
चलने से घटते , हमेशा फासले  !!
मंजिल तक पहुचेंगे ही , कहते रहो ....
जल की धारा की तरह बहते रहो !!

कभी धरती हो  बिछौना ,
कभी अम्बर ही हो चादर !
फल मिलेंगे वृक्षों से और
छतरी बन जायेंगे बादल  !!
कभी उड़ लो ख्वाब के पंखो के साथ ,
आत्म दीपक को जलना , जब भी आये काली रात !
लक्ष्य से भटको नहीं !
कही भी अटको नहीं !!
चल पड़ो चलते रहो ......
जल की धारा की तरह बहते रहो !!

---स्वामी अनंत चैतन्य -- लखनऊ ----

रविवार, 30 सितंबर 2012


कवि !
क्या तुम लिख सकते हो ??

बारिस की बूंदों की टप टप
उन मस्त हवाओं की सर सर
झरनों की ध्वनियों  की सरगम
स्पंदन , ह्रदय तंतु धड़कन  !!
यह  शब्द  नहीं संगीत है .....
क्या लिख सकते हो ??

शिव डमरू के डम डम का नाद
शिव शिव के मध्य घटा संवाद
काली का गर्जन
भैरव का नर्तन
उस परब्रम्ह परमात्मा के
पूरी श्रृष्टि का चित्रण
उस महा सूर्य का ताप
और उस पूर्ण चन्द्र के
किरणों का शीतल प्रकाश !!
यह शब्द नहीं यह ऊर्जा है ....
क्या लिख सकते हो ???

एक माँ की ममता की पुकार
उस फटे हाल अबला की लाज
प्रेमी के ह्रदय से उठी पीर
दुखिया के आंसूं की आवाज़ !!
यह भाव है कोई शब्द  नहीं ......
क्या लिख सकते हो ???
कवि क्या लिख सकते हो ??????????

--स्वामी अनंत चैतन्य -- लखनऊ ---


गुरुवार, 27 सितंबर 2012


अनाथ मानवता

अनाथालयों में
रोती , बिलखती
अनाथ मानवता !!

सड़कों के किनारों पर
सर्दियों में ठिठुरती
गर्मियों की तपिस में तपती
पंगु सामाजिकता  !!

घरों में भी तो
बूढ़े माँ बाप
पिस रहे है
खुद की ही संतानों के बीच
कौन करे देखभाल
और संभाल 
गन्दी हुयी मानसिकता  !!

मानवता अनाथ न हो
और दम न घोटे !
विषय की गंभीरता पर
आगे बढे , कुछ सोचे !!

--स्वामी अनंत चैतन्य -- लखनऊ ---







जीवन मृत्यु

काल के गाल में
सब कुछ समायेगा !
जो भी यहाँ जन्मा है
निश्चित ही ! मृत्यु भी पायेगा !!

एक पवित्र आत्मा है
अद्भुत ! अगम्य !
मृत्यु रहित , जन्म रहित
पूर्ण चैतन्य !!

जन्म भी नहीं
और मृत्यु भी नहीं !
नित नूतन और पावन
जन्मेजयी ! कालजयी !!

सब कुछ यही मिला
देह, गेह , संपत्ति !
मेरा जो है ही नहीं
क्यों फिर आशक्ति !!
--स्वामी अनंत चैतन्य --लखनऊ --

बुधवार, 26 सितंबर 2012


मै ( I ) v/s मै ( ego )

मै ,
रहता हूँ प्रतिपल
अपने मै के  साथ !
दिन व् रात !!

मै और मेरे मै में
द्वन्द छिड़ा रहता है !
मेरा मै , मेरे मै पर
हमेशा ही भारी रहता है !!
मै के आगे मै बढ़ न पाया !
मै ने हर बार ही ,  अडंगा लगाया !!

हर राग द्वेष में
मुख्य अतिथि बन आया !
आग में घी बन कर
उसे और तीव्र जलाया !!

काश मेरा मै न होता
तो , मै कितना सहज और सरल होता !
पत्थर सा कठोर नहीं
गंगा जल सा तरल होता !!

मेरे मै के कारण
मै , अपने मै में ना रहता  !
बहुतों के दिलों में रहता !!
अनंत , अक्षय , ऊर्जा में
चैतन्य पूर्ण बहता !!
--स्वामी अनंत चैतन्य -- लखनऊ ---

खुशियाँ
नहीं मनाई जाती
किसी के आंसूओं पर बैठ कर !
क्योकि ,
वहाँ रुक न पाओगे  !
नीचे गिर जाओगे !!
उसके आँखों के आंसू की नमी
सुखा देगी ,
हृदय की जमीन को
फिर उस बंजर में
उगा न पाओगे
कभी प्रेम और करूणा के बीज !!
--स्वामी अनंत चैतन्य -- लखनऊ ---