शुक्रवार, 11 मार्च 2011

एक बीज हूँ , गलने को तैयार ! !












मै एक बीज हूँ ,
गलने को तैयार हूँ !
अपने आप को दे दिया 
अब अस्तित्व के सहारे !
मेरा काम हुआ खत्म ,
अब आगे उसकी मर्जी !
चाहे उगा दे ,
चाहे किसी पत्थर के नीचे 
यूं ही बस , दबा दे !
मै तो बस गलने को तैयार हूँ  !
एक बड़ा  वृक्ष बनने के लिए !
ऐसा वृक्ष जिसकी जड़े 
धंसी  रहे जमीं में 
और उसकी फुनगी 
चूमती हो आकाश !
जिसके नीचे 
पथिक विश्रांति पायें !
और ऊपर 
परिंदे राते बितायें !!
--स्वामी अनंत चैतन्य 
( अनंत पथ का पथिक  )
         लखनऊ
 

आओ , कुछ पल ही सही चले साथ साथ !

अकेला हूँ 
लम्बा सफ़र है !

साथी आते जायेंगे 
कुछ पल साथ चल कर 
फिर छूट जायेंगे !

अकेले ही चलना नियति है !
निरंतर चलते रहना, पथ की गति है !

चाहो तो थाम लो
मेरा हाथ !
कुछ कदम ही सही 
चल लेंगे साथ साथ !
कुछ खुशी,कुछ विरह भरी 
होंगी अन्तरंग बात !

चलना होगा अकेले ही सबको 
पता नहीं अभी कितनी आएँगी 
अमावस भरी रात !
आओ , कुछ पल ही सही 
चले साथ साथ !

- स्वामी अनंत चैतन्य 
( अनंत पथ का पथिक )
      लखनऊ

अब सपने नहीं आते....

पता नहीं क्यों , 
अब सपने नहीं आते !
पिछली कितनी ही बितायी है ,
अनींद में , विरह भरी रातें !

क्या सपने देखने के लिए 
सोना जरूरी है  ?
दिन में भी जो मूर्छा में 
बस जिए जा रहें है !
वह बस बेवजह के ही तो 
सपने बुने जा रहे है !

लोग कहते है की बड़ा बनना है तो ,
बस बड़े बड़े सपने देखो !
अब मुझे बड़ा नहीं सरल बनना है !
मुझे अब कड़ा नहीं , तरल बनना  है !
शिव कृपा पाने के लिए ,
अमृत न सही , गरल बनना है !!

स्वामी अनंत चैतन्य 
( अनंत पथ का पथिक )
      लखनऊ



बेवजह , बेबात पर बस खिलखिलाता हूँ .....

खुशी ने जबसे , घर पर 
दस्तक देना बंद कर रक्खा 
तभी से मुस्कुराता हूँ  !

"बहुत खुश हूँ मै"
यह बात  मै सब को बताता हूँ  !

बेवजह , बेबात पर 
बस हँसता ,खिलखिलाता हूँ  !

खुश हूँ , यह दिखाना तो 
बाहर की बात है !
लबों  पर रोशनी रखी
दिल के अन्दर तो रात है  !

स्वामी अनंत चैतन्य 
( अनंत पथ का पथिक )
लखनऊ





शुक्रवार, 4 मार्च 2011

असली खजाना



भूत भूत बन गया !
भविष्य का पता नहीं
वर्तमान के इस क्षण को  
जीवन के
हर एक कण को
हर पहलू  के  दृष्टा  बन जाओ  
कही कोई छूट  न जाये
इसमें कोई चूक न जाए
यही अपार सम्पदा है !
खुशियाँ है !
बटोर लो , जितनी मिल सकें 
यहीं से 
भविष्य की नीव का पत्थर 
धरा जाना है !
यही तो असली  खजाना है  !!

किसी अँधेरे चौराहे पर धर देना गुरुवर ......

            
               ( सदगुरु श्री कुणाल कृष्ण जी )

       मेरे प्यारे सदगुरु , जिन्होंने मुझे नयी दिशा और दशा दी




 
जीवन पथ की कठिन  पहेली मै सुलझा न सका था ,
कभी भी कोई रस्ता मुझको सीधा नहीं मिला था  !
कुछ क्षण को यह लगने  लगा था .. मंजिल दूर नहीं ,
पर अगले पल , मोड़ ने मुझको पीछे घुमा दिया !!



बस,  इसी अबूझ पहेली को सुलझा ही रहा  था मै,
बूझ  बूझ कर बुझने वाला दिया हुवा था मद्ध्ध्म !
तभी  मेरे सदगुरु  ने मुझमे  ,भरा दिया  अलौकिक तेल,
शुद्ध कर दिया, दिया की बाती ज्योति हुयी उज्जवल !! 


दिव्य सुगंध  प्रकाश युक्त मै , जलता हूँ  हरदम
बस क्रम यू ही चलता रहे , प्रकाशित रहूँ   प्रतिपल  !
किसी अँधेरे चौराहे पर धर देना गुरुवर ,
भले मेरा तन मन जल जाए, राह करूं औरों का सुगम  !!

 स्वामी अनंत चैतन्य ,
अनंत पथ का पथिक
लखनऊ


खुशियों के घर पार्टी




उदास मन से मैंने पूछा ,
आज क्यों उदास हो ?
बोला , कारण तो पता नहीं
बस लगता है की उदास हूँ !
फिर कहा , तुम ज्यादा न सोचो 
कारण भी न जानो
क्यों की मै ज्यादा देर  रुकता नहीं एक जगह
उदासी के घर से लौट आयूंगा जल्दी ही ,
क्योकि खुशियों के घर आज पार्टी है
नृत्य है , संगीत है , बुलावा आया है !!



                                                                  स्वामी अनंत चैतन्य
                                                             ( अनंत पथ का एक पथिक )
                                                                          लखनऊ