शुक्रवार, 18 मार्च 2011

हे प्रभु ! करूणा करो अब !


( दि. ११.३.२०११ में जापान में आई भयानक त्रासदी  (सुनामी ) से दुखी होकर लिखे उदगार )

हे प्रशांत ! तू  अशांत क्यों हुआ
हाय तूने क्या किया !!

मानवता के विनाश में ,
एक पन्ना फिर से तेरा जुड़ गया !

तू गंभीर है , अधीर क्यों हुआ ,
हाय तूने क्या किया !!

अनगिनत जीवन मिटा कर ,
काल तांडव कर गया  ! !

हे प्रभु !
करूणा करो अब  !
द्रवित हो ,
सूखे ह्रदय में ,
खुशिया भरो अब !!

स्वामी अनंत चैतन्य 
( अनंत पथ का एक पथिक )
      लखनऊ
 


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